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आफत में शिक्षक स्कूल नहीं आ रहे बच्चें दिसंबर तक कैसे बनाएंगे निपुण

बेसिक शिक्षा विभाग के सरकारी विद्यालयों में पंजीकृत बच्चों की उपस्थिति नहीं बढ़ रही है।बच्चों के नियमित विद्यालय नहीं आने से निपुण भारत अभियान की सफलता पर सवालिया निशान लग गया है।

सिकंदरा कानपुर देहात. बेसिक शिक्षा विभाग के सरकारी विद्यालयों में पंजीकृत बच्चों की उपस्थिति नहीं बढ़ रही है। हैरत वाली बात यह है कि यूनीफॉर्म का पैसा लेने वाले बच्चे भी स्कूल की चौखट तक नहीं पहुंच रहे हैं। बच्चों के नियमित विद्यालय नहीं आने से निपुण भारत अभियान की सफलता पर सवालिया निशान लग गया है। अब विभाग उन बच्चों के बारे में जानकारी हासिल करने में जुटा है जो रजिस्टर पर तो हैं मगर विद्यालय नहीं आते। जिले में 1925 परिषदीय विद्यालयों में करीब एक लाख 54 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें से मात्र 60 फीसदी बच्चे ही स्कूलों में पहुंच रहे हैं।

परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से तीन तक के विद्यार्थियों के निपुण बनने में अध्यापकों के पसीने छूट रहे हैं। स्कूलों को निपुण करना बड़ी चुनौती बना हुआ है। दिसंबर माह में सभी विद्यार्थियों को निपुण किया जाना है। स्कूलों में विद्यार्थियों की कम उपस्थिति सबसे बड़ी वजह बन रही है। निपुण भारत मिशन के तहत विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा एक से तीन तक के विद्यार्थियों को निपुण बनाकर विद्यालयों को निपुण घोषित करने का अभियान चल रहा है।

विद्यार्थियों को हिंदी और गणित में दक्ष बनाने में अध्यापक जुटे हुए हैं। निपुण घोषित किए जाने वाले मानक के अनुसार कक्षा एक के विद्यार्थियों को सरल वाक्य पढ़ना सिखा रहे हैं और गणित में एक अंकीय सवालों का अभ्यास करा रहे हैं। कक्षा दो में एक मिनट में 45 शब्द पढ़ना, प्रश्नों के उत्तर देना, दो अंकीय घटाओ और गणित में दो अंकीय जोड़ और घटाओ के सवाल कराने का अभ्यास करा रहे हैं।

कक्षा तीन में एक मिनट में 60 शब्द पढ़ाना, प्रश्नों के उत्तर और गणित में तीन अंकीय जोड, गुणा और भाग के सवालों को कराया जा रहा है। अध्यापक तो विद्यार्थियों को निपुण बनाने में जी जान से लगे हैं लेकिन उनकी कम उपस्थिति बाधा बन रही है। कभी कभार अध्यापक अवकाश पर रहते हैं और कभी अवकाश आड़े आ जाते हैं शेष दिनों में कई बच्चें कभी कभार ही स्कूल आते हैं ऐसे में इन विद्यालयों के बच्चों को निपुण बनाना अध्यापकों के लिए चुनौती बना हुआ है…

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